Saturday, April 26, 2014

Movie Review: BHAAG MILKHA BHAAG

Movie Details

Title: Bhaag Milkha Bhaag
Director: Rakesh Om Prakash Mehra
Music: Shankar Ehsaan Loy
Genre: Biographical
Running Time: 189 Minutes
Language: Hindi
Rating: 4/5

Plot Summary. .

The film is a biopic drama about the flying sikh Milkha Singh tracing his journey from highs and lows, crafted diligently to weave a complete drama taking care of minutest of the detail. The marathon which starts with a motive to have a glass of milk and continues to take him to the pedestal of international athletic arena. It effortlessly shows the power preservance and dedication.

Friday, April 18, 2014

Book Review: CHANAKYA'S CHANT BY Ashwin Sanghi

Book Details. . .


Title: Chanakya’s Chant
Author: Ashwin Sanghi
Genre: Political Fiction
Publisher: Westland
Pages: 448 Pages
Price: INR 88
Rating: 3.5/5


Book Synopsis. . .


There's this Brahmin, in ancient India, who has been carrying the burden of the insult and agony of his father's gruesome murder determined to take a revenge & to give a responsible heir to undivided India. Then there's this Pandit from Kanpur, in modern India, anxious to have tryst with destiny to assume political supremacy in the country. Two different souls from two different periods weave grappling & engaging political drama which is bound to keep you glued till the finish. 


Monday, April 07, 2014

Book Review: MAHATMA Vs. GANDHI by Dinkar Joshi


Title: Mahatma vs. Gandhi
Author: Dinkar Joshi
Genre: Non Fiction / History
Publisher: Jaico Publishing House
Pages: 296 Pages
Price: INR 250

Book Synopsis. . .

‘Bapu had failed to convince two people in his lifetime one was Jinnah and the other was Harilal...’ Thus starts the journey of anecdotes, exploring the personal anguish and mental torment between the father (Mahatma Gandhi) and his eldest son (Harilal Gandhi).

Wednesday, April 02, 2014

Sai Satcharitra (Hindi) - Chapter 35

Sai Satcharitra - Chapter 35


*श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 35*  

परीक्षा में असफल
------------------------------------------------- 

काका महाजनी के मित्र और सेठ, निर्बीज मुनक्के, बान्द्रा निवासी एक गृहस्थ की नींद आने की घटना, बालाजी पाटील नेवासकर, बाबा का सर्प के रुप में प्रगट होना

इस अध्याय में भी उदी का माहात्म्य ही वर्णित है इसमें ऐसी दो घटनाओं का उल्लेख है कि परीक्षा करने पर देखा गया कि बाबा ने दक्षिणा अस्वीकार कर दी पहले इन घटनाओं का वर्णन किया जायेगा

Sai Satcharitra (Hindi) - Chapter 34

Sai Satcharitra - Chapter 34


*श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 34*  

उदी की महत्ता (2), डाँक्टर का भतीजा, डाँक्टर पिल्ले, शामा की भयाहू, ईरानी कन्या, हरदा के महानुभाव, बम्बई की महिला की प्रसव पीड़ा
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

इस अध्याय में भी उदी की ही महत्ता क्रमबद्घ है तथा उन घएटनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें उसका उपयोग बहुत ही प्रभावकारी सिकदृ हुआ

Sai Satcharitra (Hindi) - Chapter 33

Sai Satcharitra - Chapter 33


*श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 33*  

उदी की महिमा, बिच्छू का डंक, प्लेग की गाँठ, जामनेर का चमत्कार, नारायण राव, बाला बुवा सुतार, अप्पा साहेब कुलकर्णी, हरीभाऊ कर्णिक
------------------------------------------------- 

पूर्व अध्याय में गुरु की महानता का दिग्दर्शन कराया गया है अब इस अध्याय में उदी के माहात्म्य का वर्णन किया जायेगा


प्रस्तावना
-----------
आओ, पहले हम सन्तों के चरणों में प्रणाम करें, जनकी कृपादृरष्टि मात्र से ही समस्त पापसमूह भस्म होकर हमारे आचरण के दोष नष्ट हो जायेंगे उनसे वार्तालाप करना हमारे लिये शिक्षाप्रद और अति आनन्ददायक है वे अपने मन में यह मेरा और वह तुम्हारा ऐसा कोई भेद नहीं रखते इस प्रकार के भेदभाव की कल्पना उनके हृदय में कभी भी उत्पन्न नहीं होती उनका ऋण इस जन्म में तो क्या, अनेक जन्मों में भी चुकाया जा सकेगा

Sai Satcharitra (Hindi) - Chapter 32


Sai Satcharitra - Chapter 32


*श्री साई सच्चरित्र - अध्याय 32*  

गुरु और ईश्वर की खोज, उपवास अमान्य
------------------------------------------------- 

इस अध्याय में हेमाडपंत ने दो विषयों का वर्णन किया है

किस प्रकार अपने गुरु से बाबा की भेंट हुई और उनके द्घारा ईश्वरदर्शन की प्राप्ति कैसे हुई
श्रीमती गोखले को जो तीन दिन से उपवास कर रही थी, उसे पूरनपोली के भोजन कराये


प्रस्तावना
------------ 
श्री. हेमाडपंत वटवृक्ष का उदाहरण देकर इस गोचर संसार के स्वरुप का वर्णन करते है गीता के अनुसार वटवृक्ष की जड़ें ऊपर और शाखाएँ नीचे की ओर फैली हुई है ऊध्र्वमूलमधः शाखाम् (गीता पंद्रहवाँ अध्याय, श्लोक 1) इस वृक्ष के गुण पोषक ौर अंकुर इंद्रियों के भोग्य पदार्थ है जड़ें जिनका कारणीभूत कर्म है, वे सृष्टि के मानवों की ओर फैली हुई है इस वृक्ष की रचना बतड़ी ही विचित्र है तो इसके आकार, उदगम और अन्त का ही भान होता है और ही इसके आश्रय का इस कठोर जड़ वाले संसार रुपी वृक्ष को, वैराग्य के अमोघ शस्त्र द्घारा नष्ट करने के हेतु किसी बाह्य मार्ग का अवलंबन करना अत्यंत आवश्यक है , ताकि इस असार-संसार में आवागमन से मुक्ति प्राप्त हो इस पथ पर अग्रसर होने के लिये किसी योग्य दिग्दर्शक (गुरु) की नितांत आवश्यकता है चाहे कोई कितना ही विद्घान् अथवा वेद और वेदांत में पारंगत क्यों हो, वह अपने निर्दिष्ट स्थान पर नहीं पहुँच सकता, जब तक कि उसकी सहायतार्थ कोई योग्य. पथ प्रदर्शक मिल जाये, जिसके पद चिन्हों का अनुसरण करने से ही मार्ग में मिलने वाले गहृरों, खंदकों तथा हिंसक प्राणियों के भओय से मुक्त हुआ जा सकता है और इस विधि से ही संसार-यात्रा सुगम तथा कुशलतापूर्वक पूर्ण हो सकती है इश विषय में बाबा का अनुभव, जो उन्होंने स्वय बतलाया, वास्तव में आश्चर्यजनक है यदि हम उसका ध्यानपूर्वक अनुसरण करेंगें तो हमें निश्चय ही श्रद्घा, भक्ति और मुक्ति प्राप्त होगी

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...